Thursday, April 30, 2009

Cricket Reporter

खिलाड़ी नहीं बन पाया तो चलो खेल पत्रकार बन गया। अंकल कहते थे। (Late Anil Saari Arora, Film Citics) करियर की शुरूआत करनी है तो पहले प्रिंट से करना तभी खिलाड़ियों से अच्छा संबंध बनेगें। और लिखना भी सीख जाओगे। फिर टी.वी में जाना। मुझ पर तो टी.वी में काम करने की धुन सवार थी। एक चैनल में नौकरी मिल गई हाथ में माइक लेकर दौड़ भाग करने लगा। न दिन देखा ना रात पूरे जुनन के साथ काम करना शुरू कर दिया। छोटे चैनल में था तो बड़े चैनल के क्रिकेट रिपोर्टर मुझे गंभीरता से नहीं लेते थे। लेकिन उससे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता था। काम करता और सोचता मुझे भी कभी मौका मिलेगे। और में विदेश जाकर बड़े क्रिकेटर्स का इंटरव्यू करूंगा। भारत में तो खेल पत्रकारिता का मतलब क्रिकेट पत्रकारिता है। जो खेल रिपोर्टर क्रिकेट कवर करता है वो अपने आप को किसी सेलिब्रेटी से कम नहीं समझता। गोरी चमड़ी वाली महिला पत्रकार है तो फिर कहना ही क्या। उसकी चाल ढाल कपड़े पहनने का तरीका... सब बदल जाता है। अगर क्रिकेट की नॉलेज की बात करें तो इन्हें ये नहीं पता कि मिड विकेट किधर है... स्क्वायर लेग और फाइन लेग कहां है...लगभग हर बड़े चैनल का क्रिकेट रिपोर्टर अपनी मार्केटिंग करता नज़र आयेगा...कभी अपने किसी बड़े इंटरनेशनल खिलाड़ी से संबंध का हवाला देगा तो कभी...बीसीसीआई की दुहाई देगा...आमतौर पर रिपोर्टर अपने सर्किल में या फिर जूनियर्स के आगे कहते फिरेंगे कि निरजन शाह तो मुझे फोन करके ख़बर देता है। और सहवाग से जब मांगो तब इंटरव्यूह दे देगा। लेकिन जब ब्रेकिंग की बारी आयेगी...तो सुबह के अखबार में छपे एक एक लफ्ज को आप टीवी स्क्रीन पर देख लेंगे...बॉस का प्रेशर बढ़ेगा तो बाइट की याद आयेगी...और फिर बाइट लेने की होड़ में शामिल हो जायेंगे...सहारा फिर छोटे चैनल के रिपोर्टर्स का ही होगा...पूरी धमक के साथ ट्रांसफर लेने के लिये तैयार होंगे...पूछेगें भाई आज कुछ है तो नहीं। कुछ हो तो बता देना। नहीं तो डंप दे देना। छोटा चैनल का रिपोर्टर इसलिए इन्हें बता देता है एक दिन मुझे भी अपने पास बुला लेगा। मैं भी बड़े चैनल पर लाइव करता दिखुगां। सच्चाई ये है कि बड़े चैनल के ये बड़े रिपोर्टर्स नामी गिरामी क्रिकेटर्स के सामने गिड़गिडाते हैं। भाई एक इंटरव्यू देदे नहीं तो नौकरी चली जाएगी। मैं तेरे आगे हाथ पैर जोड़ता हूं। क्रिकेटर इंटरव्यूह देता है। फिर बाहर चौड़े होकर निकलते है। माहौल बनता है...कि भाई जनाब के तो बड़े लोगों से अच्छे सम्बंध हैं...शायद एक यही सबसे बड़ी वजह है कि एक टी.वी चैनल के बड़े से बड़े रिपोर्टर को छोटे से छोटा क्रिकेटर डांट देता है। लेकिन एक छोटे से छोटे अखबार को बड़े से बड़ा क्रिकेटर कुछ बोल नहीं पाता। टेलिवीजन में क्रिकेट को लेकर सबसे ज्यादा रस्साकशी विदेशी दौरों को लेकर होती है। हर टी.वी पत्रकार अपने साथी रिपोर्टर की लुटिया डुबोने में लगे रहते हैं...इनके लिये विदेशी दौरा... मतलब पैसा कमाने का ज़रिया..लम्बी चौड़ी गाड़ियां और शानदार फ्लैट दौरों की ही सौगात है...मैं जिस बडे़ चैनल में नौकरी कर रहा था। वहां के इंचार्ज ने मुझसे बोला जाओ गुंडप्पा विश्वनाथ के शाट्स कटालो । फिर इंचार्ज बोला जानते हो वो भारतीय टीम का सलामी बल्लेबाज था। मैने डर के मारे उससे कुछ नहीं कहा लेकिन सच तो ये कि विश्वनाथ तो मिडिल ऑर्डर बल्लेबाज थे। सोचा इनके गले में घंटी कौन बांधे...फिर मैने अपने एक दोस्त सौरव से कहा... यार गुंडप्पा विश्वनाथ तो मिडिल आर्डर बल्लेबाज़ है । सौरव बोला सर छोड़ो शॉट्स काट देते हैं। कुछ मत बोलो वैसे भी ये चैनल के बड़े अधिकारी हैं। मेरे इस्तीफे के बाद सौरव कुछ उदास दिखने लगा। क्योंकि उसका भी बड़े खेल पत्रकारों से जी ऊब गया था...किसी तरह से बस टाइम काट रहा था...लेकिन एक दिन अचानक उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा...उसने मुझे फोन पर खुश खबरी दी... कि सर मेरा ट्रंसफर हो गया है। दूसरे रीजनल चैनल में जा रहा हूं। अब अपने हिसाब से काम करूंगा कोई बदतमीजी भी नहीं होगी। .... इससे पहले मैने सौरव को भी इतना खुश नहीं देखा था। अब मैं भी बड़े चैनस से निजात पाकर खुश हूं.... मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ था। (कालू काल्पनिक नाम) कालू मेरा अच्छा दोस्त हुआ करता था। रोज मुझसे बात करता भाई कुछ हो तो बता देना.... रात रात को फोन करना जैसे उसकी आदत में शुमार हो गया था। लेकिन जब मुझे उसके साथ काम करने का मौका मिला तो देखा वो पूरी तरह बदल गया है। मैने इस चैनल में सीनियर कोरसपोंटेड के तौर पर ज्वॉइन किया .... अचानक फर्क देखा कि कल तक जो दोस्त थे। वो अचानक दुश्मन हो गए... मैने हर बार कोशिश की ये लोग मेरे साथ अच्छा व्यवाहर करे लेकिन सारी कोशिश धरी की धरी रहे गई। बात इतनी बढ़ने लगी कि वो लोग मुझे पूरे न्यूज रूम में गाली और नौकरी से निकलवाने की धमकी देने लगे। मैने इसका विरोध किया। मेल लिख कर इनकी शिकायत की लेकिन कुछ नहीं हुआ। फिर जाना लॉबिंग किसे कहते है। जो रिपोर्टर मुझ से सबसे ज्यादा बदतमीजी करता उसकी तो बात ही क्या स्क्रिप्ट चुराने में वो सबसे ज्याद माहिर था।किस स्क्रिप्ट को कहां से चुरा कर लिखनी है इसका तो वो मास्टर था। ये वो भी जानता था। नया स्पोर्ट्स इंचार्ज तो उससे सबसे ज्यादा डरता भी था। अब जनाब का ट्रांसफर साउथ इंडिया हो गया है। पूछने पर बताता है कि वो ब्यूरो चीफ है। लाइव और टी.वी में आने का इतना शौकीन जैसे भूखे को खाना। पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त।

1 comment:

  1. rocking mate... great stuff.... i never thought u would write in such a mindblowing manner.... hope u would write more...

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